एभिः स्तवैश्च मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः । तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम् ॥ २ ॥
ebhiḥ stavaiśhcha māṁ nityaṁ stoṣhyate yaḥ samāhitaḥ tasyāhaṁ sakalāṁ bādhāṁ nāśhayiṣhyāmyasaṁśhayam
हिंदी अर्थ
"जो एकाग्रचित्त होकर प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरा स्तवन करेगा, उसकी सारी बाधा मैं निश्चय ही दूर कर दूँगी।
भावार्थ
अध्याय 12 फलस्तुति है, इस ग्रंथ के पाठ के फल के बारे में स्वयं देवी का कथन। "इन स्तुतियों" से सामान्यतः चार महान स्तुतियाँ समझी जाती हैं: ब्रह्मा की (अध्याय 1), शक्रादि स्तुति (अध्याय 4), अपराजिता स्तुति (अध्याय 5) और नारायणी स्तुति (अध्याय 11)। गीता प्रेस यहाँ "शम॰" पाठान्तर बताता है। कुछ संस्करणों में इस अध्याय का नाम "भगवती वाक्यम्" (देवी के वचन) है।
