Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 11

फलस्तुति

जानताऽजानता वापि बलिपूजां तथा कृताम् । प्रतीच्छिष्याम्यहं प्रीत्या वह्निहोमं तथा कृतम् ॥ ११ ॥

jānatā’jānatā vāpi balipūjāṁ tathā kṛitām pratīchchhiṣhyāmyahaṁ prītyā vahnihomaṁ tathā kṛitam

हिंदी अर्थ

ऐसा करने पर मनुष्य विधि जानकर या बिना जाने भी मेरे लिए जो बलि, पूजा या होम करेगा, उसे मैं बड़ी प्रसन्नता से ग्रहण करूँगी।

भावार्थ

"जानताऽजानता वा": विधि जानकर या बिना जाने। उन साधारण भक्तों के लिए एक आश्वासन भरा श्लोक जो हर नियम नहीं जानते। गीता प्रेस यहाँ "प्रतीक्षिष्यामि" पाठान्तर बताता है।