Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 22

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टिस्वधे ध्रुवे । महारात्रि महाऽविद्ये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ २२ ॥

lakṣhmi lajje mahāvidye śhraddhe puṣhṭisvadhe dhruve mahārātri mahā’vidye nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

लक्ष्मी, लज्जा, महाविद्या, श्रद्धा, पुष्टि, स्वधा, ध्रुवा, महारात्रि और महा-अविद्या रूपा नारायणि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

नामों की एक माला जो विद्या और अविद्या को साथ रखती है: वे महाविद्या भी हैं और महा-अविद्या भी। गीता प्रेस यहाँ तीन पाठान्तर बताता है: "पुष्टे", "रात्रे", और "महाऽविद्ये" के स्थान पर "महामाये"।