Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 20

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

शिवदूतीस्वरूपेण हतदैत्यमहाबले । घोररूपे महारावे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ २० ॥

śhivadūtīsvarūpeṇa hatadaityamahābale ghorarūpe mahārāve nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

शिवदूती रूप से दैत्यों की महती सेना का संहार करने वाली, भयंकर रूप और विकट गर्जना वाली नारायणि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

शिवदूती, जिन्होंने शिव को अपना दूत बनाकर भेजा (8.22–27)।