अहं विभूत्या बहुभिरिह रूपैर्यदास्थिता । तत्संहृतं मयैकैव तिष्ठाम्याजौ स्थिरो भव ॥ ८ ॥
ahaṁ vibhūtyā bahubhiriha rūpairyadāsthitā tatsaṁhṛitaṁ mayaikaiva tiṣhṭhāmyājau sthiro bhava
हिंदी अर्थ
"अपनी विभूति से मैं जिन अनेक रूपों में यहाँ स्थित थी, उन्हें मैंने समेट लिया है। अब मैं अकेली युद्ध में खड़ी हूँ; तुम भी स्थिर हो जाओ।"
भावार्थ
अब सचमुच एक के सामने एक है। देवी शुम्भ के ताने का उत्तर तर्क से नहीं, प्रदर्शन से देती हैं।
