Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 25

शुम्भवध

स क्षिप्तो धरणीं प्राप्य मुष्टिमुद्यम्य वेगितः । अभ्यधावत दुष्टात्मा चण्डिकानिधनेच्छया ॥ २५ ॥

sa kṣhipto dharaṇīṁ prāpya muṣhṭimudyamya vegitaḥ abhyadhāvata duṣhṭātmā chaṇḍikānidhanechchhayā

हिंदी अर्थ

पटके जाने पर पृथ्वी पर आकर वह दुष्टात्मा फिर मुक्का तानकर चण्डिका को मारने के लिए बड़े वेग से दौड़ा।

भावार्थ

अब भी वह नहीं रुकता। गीता प्रेस यहाँ "वेगितः" पढ़ता है, और "वेगवान्" पाठान्तर बताता है।