आस्तीर्य शेषमभजत्कल्पान्ते भगवान् प्रभुः । तदा द्वावसुरौ घोरौ विख्यातौ मधुकैटभौ ॥ ६७ ॥
āstīrya śheṣhamabhajatkalpānte bhagavān prabhuḥ tadā dvāvasurau ghorau vikhyātau madhukaiṭabhau
हिंदी अर्थ
शेषनाग की शय्या बिछाकर योगनिद्रा में सो गए थे, तब मधु और कैटभ नाम के दो प्रसिद्ध भयंकर असुर
भावार्थ
विष्णु ब्रह्मांडीय सागर में शेषनाग पर सोए हैं, मंदिर-कला का एक परिचित दृश्य। उनकी निद्रा "योगनिद्रा" है: साधारण नींद नहीं, बल्कि स्वयं देवी द्वारा धारण की गई दिव्य अवस्था।
