ब्रवीति कथमुत्पन्ना सा कर्मास्याश्च किं द्विज । यत्प्रभावा च सा देवी यत्स्वरूपा यदुद्भवा ॥ ६१ ॥
bravīti kathamutpannā sā karmāsyāśhcha kiṁ dvija yatprabhāvā cha sā devī yatsvarūpā yadudbhavā
हिंदी अर्थ
हे द्विज! बताइए, वे कैसे उत्पन्न हुईं और उनके कर्म क्या हैं? उनका प्रभाव क्या है, स्वरूप क्या है और उद्भव कैसे हुआ?
भावार्थ
ये प्रश्न (उद्भव, कर्म, प्रभाव, स्वरूप) आगे आने वाले पूरे ग्रंथ की संरचना बनाते हैं। गीता प्रेस यहाँ पाठान्तर बताता है ("कर्म चास्याश्च", "यत्स्वभावा")।
