ममास्य च भवत्येषा विवेकान्धस्य मूढता ॥ ४५ ॥
mamāsya cha bhavatyeṣhā vivekāndhasya mūḍhatā
हिंदी अर्थ
मुझमें और इसमें, दोनों में यह विवेकहीन की सी मूढ़ता है।"
भावार्थ
"विवेक" ज्ञान के रूप में उपस्थित है पर अनुभव के रूप में अनुपस्थित। ऋषि का उत्तर तर्क नहीं, एक कथा होगी।
