Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 45

मधुकैटभवध

ममास्य च भवत्येषा विवेकान्धस्य मूढता ॥ ४५ ॥

mamāsya cha bhavatyeṣhā vivekāndhasya mūḍhatā

हिंदी अर्थ

मुझमें और इसमें, दोनों में यह विवेकहीन की सी मूढ़ता है।"

भावार्थ

"विवेक" ज्ञान के रूप में उपस्थित है पर अनुभव के रूप में अनुपस्थित। ऋषि का उत्तर तर्क नहीं, एक कथा होगी।