तेषु किं भवतः स्नेहमनुबध्नाति मानसम् ॥ २८ ॥
teṣhu kiṁ bhavataḥ snehamanubadhnāti mānasam
हिंदी अर्थ
उनके प्रति तुम्हारा मन स्नेह से क्यों बँधा हुआ है?"
भावार्थ
यह ढाँचा-कथा का केंद्रीय प्रश्न है: जिसने चोट पहुँचाई, हृदय उसी से क्यों बँधा रहता है? इसका उत्तर देने में पूरी सप्तशती लगती है।
