Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 19

मधुकैटभवध

प्रत्युवाच स तं वैश्यः प्रश्रयावनतो नृपम् ॥ १९ ॥

pratyuvācha sa taṁ vaiśhyaḥ praśhrayāvanato nṛipam

हिंदी अर्थ

वह वैश्य विनय से झुककर राजा को उत्तर देने लगा।

भावार्थ

पारंपरिक 700 की गणना में यह अर्धश्लोक अलग मंत्र गिना जाता है। यह बस वैश्य के उत्तर की भूमिका बनाता है।