Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 121

देव्या दूतसंवाद

तदागच्छतु शुम्भोऽत्र निशुम्भो वा महासुरः । मां जित्वा किं चिरेणात्र पाणिं गृह्णातु मे लघु ॥ १२१ ॥

tadāgachchhatu śhumbho’tra niśhumbho vā mahāsuraḥ māṁ jitvā kiṁ chireṇātra pāṇiṁ gṛihṇātu me laghu

हिंदी अर्थ

इसलिए शुम्भ या महादैत्य निशुम्भ यहाँ आएँ, मुझे जीतकर शीघ्र मेरा पाणिग्रहण करें; देर क्यों?"

भावार्थ

एक खुली चुनौती, शांत आत्मविश्वास के साथ।