इत्युक्ता सा तदा देवी गम्भीरान्तःस्मिता जगौ । दुर्गा भगवती भद्रा ययेदं धार्यते जगत् ॥ ११६ ॥
ityuktā sā tadā devī gambhīrāntaḥsmitā jagau durgā bhagavatī bhadrā yayedaṁ dhāryate jagat
हिंदी अर्थ
इस प्रकार कहे जाने पर जगत को धारण करने वाली कल्याणमयी भगवती दुर्गा मन ही मन गंभीरता से मुस्कराईं और बोलीं।
भावार्थ
"गम्भीरान्तःस्मिता" (मन ही मन गंभीरता से मुस्कराती हुई): देवी इस प्रस्ताव से विनोदित हैं। उनका उत्तर विडंबना की एक उत्कृष्ट कृति है।
