व्रियतां त्रिदशाः सर्वे यदस्मत्तोऽभिवाञ्छितम् ॥ ३२ ॥
vriyatāṁ tridaśhāḥ sarve yadasmatto’bhivāñchhitam
हिंदी अर्थ
"हे देवताओ! तुम सब मुझसे जो चाहते हो, वह माँगो।"
भावार्थ
देवी वर देने को कहती हैं। गीता प्रेस बताता है कि आधुनिक प्रतियों में यहाँ एक पंक्ति और है ("इन स्तुतियों से पूजित होकर मैं अत्यंत प्रसन्नता से देती हूँ")।
