भक्त्या समस्तैस्त्रिदशैर्दिव्यैर्धूपैस्तु धूपिता । प्राह प्रसादसुमुखी समस्तान् प्रणतान् सुरान् ॥ ३० ॥
bhaktyā samastaistridaśhairdivyairdhūpaistu dhūpitā prāha prasādasumukhī samastān praṇatān surān
हिंदी अर्थ
और सब देवताओं द्वारा भक्तिपूर्वक दिव्य धूपों से धूपित होकर, प्रसन्नमुखी देवी ने प्रणाम करते हुए सब देवताओं से कहा।
भावार्थ
गीता प्रेस यहाँ "सुधूपिता" पाठान्तर बताता है।
