तस्यच्छित्त्वा ततो देवी लीलयैव शरोत्करान् । जघान तुरगान् बाणैर्यन्तारं चैव वाजिनाम् ॥ ४ ॥
tasyachchhittvā tato devī līlayaiva śharotkarān jaghāna turagān bāṇairyantāraṁ chaiva vājinām
हिंदी अर्थ
तब देवी ने खेल-खेल में ही उसके बाणों के समूह को काटकर अपने बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को मार डाला।
भावार्थ
"लीलया" (खेल-खेल में) फिर आता है (जैसे 2.50 में)। उनकी सहजता एक बार-बार आने वाला विषय है।
