Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 4

महिषासुरवध

तस्यच्छित्त्वा ततो देवी लीलयैव शरोत्करान् । जघान तुरगान् बाणैर्यन्तारं चैव वाजिनाम् ॥ ४ ॥

tasyachchhittvā tato devī līlayaiva śharotkarān jaghāna turagān bāṇairyantāraṁ chaiva vājinām

हिंदी अर्थ

तब देवी ने खेल-खेल में ही उसके बाणों के समूह को काटकर अपने बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को मार डाला।

भावार्थ

"लीलया" (खेल-खेल में) फिर आता है (जैसे 2.50 में)। उनकी सहजता एक बार-बार आने वाला विषय है।