गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ॥ ३८ ॥
garja garja kṣhaṇaṁ mūḍha madhu yāvatpibāmyaham mayā tvayi hate’traiva garjiṣhyantyāśhu devatāḥ
हिंदी अर्थ
"ओ मूढ़! जब तक मैं मधु पीती हूँ, तब तक क्षण भर गर्ज ले। यहीं मेरे हाथों तेरे मारे जाने पर शीघ्र ही देवता गर्जना करेंगे।"
भावार्थ
"गर्ज गर्ज क्षणं मूढ" सप्तशती की सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों में से एक है, जो अपने निर्भीक आत्मविश्वास के लिए प्रायः उद्धृत होती है। असुर की गर्जना क्षणिक है; देवताओं की विजय-गर्जना आने वाली है।
