Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 24

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

वैश्यवर्य त्वया यश्च वरोऽस्मत्तोऽभिवाञ्छितः ॥ २४ ॥

vaiśhyavarya tvayā yaśhcha varo’smatto’bhivāñchhitaḥ

हिंदी अर्थ

वैश्यवर्य! तुमने भी जिस वर को मुझसे पाने की इच्छा की है,

भावार्थ

अब समाधि को वरदान।