Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 39

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥ ३९ ॥

sarvābādhāpraśhamanaṁ trailokyasyākhileśhvari evameva tvayā kāryamasmadvairivināśhanam

हिंदी अर्थ

"सर्वेश्वरि! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों की सब बाधाओं को शांत करो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो।"

भावार्थ

देवता माँगते हैं कि वे जो अभी किया, वह सदा करती रहें।