Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 23

शुम्भवध

नियुद्धं खे तदा दैत्यश्चण्डिका च परस्परम् । चक्रतुः प्रथमं सिद्धमुनिविस्मयकारकम् ॥ २३ ॥

niyuddhaṁ khe tadā daityaśhchaṇḍikā cha parasparam chakratuḥ prathamaṁ siddhamunivismayakārakam

हिंदी अर्थ

तब दैत्य और चण्डिका आकाश में एक-दूसरे से बाहुयुद्ध करने लगे, जो पहले सिद्धों और मुनियों को विस्मय में डालने वाला था।

भावार्थ

आकाश में युद्ध, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।