Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 87

मधुकैटभवध

बोधश्च क्रियतामस्य हन्तुमेतौ महासुरौ ॥ ८७ ॥

bodhaśhcha kriyatāmasya hantumetau mahāsurau

हिंदी अर्थ

और इन दोनों महासुरों को मारने के लिए उन्हें जगाओ।"

भावार्थ

ब्रह्मा की स्तुति समाप्त होती है। इसके आरंभिक शब्द, "त्वं स्वाहा त्वं स्वधा", सप्तशती की सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों में से हैं।