तस्य सर्वस्य या शक्तिः सा त्वं किं स्तूयसे तदा । यया त्वया जगत्स्रष्टा जगत्पात्यत्ति यो जगत् ॥ ८३ ॥
tasya sarvasya yā śhaktiḥ sā tvaṁ kiṁ stūyase tadā yayā tvayā jagatsraṣhṭā jagatpātyatti yo jagat
हिंदी अर्थ
उस सबकी जो शक्ति है, वह तुम्हीं हो। तब तुम्हारी स्तुति कैसे हो सकती है? जो इस जगत की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं,
भावार्थ
हर स्तुति का महान विरोधाभास: अंश पूर्ण की स्तुति कैसे करे? ब्रह्मा स्वीकार करते हैं कि शब्द असफल हैं। गीता प्रेस यहाँ पाठान्तर बताता है ("मया", "पातात्ति")।
