Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 38

मधुकैटभवध

उपविष्टौ कथाः काश्चिच्चक्रतुर्वैश्यपार्थिवौ ॥ ३८ ॥

upaviṣhṭau kathāḥ kāśhchichchakraturvaiśhyapārthivau

हिंदी अर्थ

वह वैश्य और राजा बैठकर उनसे कुछ बातें करने लगे।

भावार्थ

एक अर्धश्लोक, जो अलग गिना जाता है, दोनों को ऋषि के चरणों तक लाता है। अब शिक्षा आरंभ हो सकती है।