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ॐ

रघुपति राघव राजाराम – राम धुन

राम धुन "रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम" अपने पारंपरिक रूप में, जिसे लक्ष्मणाचार्य की रचना माना जाता है — इसकी पंक्तियों का अर्थ, और कैसे गांधी जी का परिवर्तित रूप दांडी मार्च का गीत बना।

मूल पाठ

रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम ॥ सुंदर विग्रह मेघश्याम गंगा तुलसी शालग्राम ॥ रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम ॥ भद्रगिरीश्वर सीताराम भगत-जनप्रिय सीताराम ॥ रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम ॥ जानकीरमणा सीताराम जयजय राघव सीताराम ॥ रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम ॥

लिप्यंतरण

Raghupati Raghav Rajaram Patit Pavan Sitaram. Sundar Vigrah Meghashyam Ganga Tulasi Shalagram. Raghupati Raghav Rajaram Patit Pavan Sitaram. Bhadragirishvar Sitaram Bhagat-janapriy Sitaram. Raghupati Raghav Rajaram Patit Pavan Sitaram. Janakiramana Sitaram Jayajay Raghav Sitaram. Raghupati Raghav Rajaram Patit Pavan Sitaram.

पंक्तियों का अर्थ

  • रघुपति राघव राजाराम: रघुकुल के स्वामी, रघु के वंशज, राजा राम।
  • पतित पावन सीताराम: पतितों को पावन करने वाले सीता-राम।
  • सुंदर विग्रह मेघश्याम: जिनका सुंदर रूप मेघ जैसा श्याम है;
  • गंगा तुलसी शालग्राम: गंगा, तुलसी और शालग्राम में उपस्थित — घर में विष्णु-उपासना के तीन सबसे पवित्र दैनिक रूप।
  • भद्रगिरीश्वर सीताराम: भद्रगिरि के स्वामी सीता-राम — गोदावरी तट पर भद्राचलम, आज के तेलंगाना का प्रसिद्ध राम मंदिर।
  • भगत-जनप्रिय सीताराम: भक्तों के प्रिय सीता-राम;
  • जानकीरमणा सीताराम, जयजय राघव सीताराम: जानकी को आनंद देने वाले राम; राघव और सीता की जय।

यह एक धुन है — समूह में गाने के लिए छोटा, दोहराया जाने वाला कीर्तन, जिसमें हर युगल के बाद टेक लौटती है और प्रायः लय बढ़ती जाती है।

किसने लिखा

पारंपरिक पाठ लक्ष्मणाचार्य का माना जाता है, और उनके रामायण काव्य श्री नाम रामायणम् से जोड़ा जाता है। भद्रगिरि का उल्लेख भद्राचलम की भक्ति परंपरा से इसका संबंध दर्शाता है।

गांधी जी का रूप

1930 के दांडी मार्च में गांधी जी के सत्याग्रहियों ने विष्णु दिगंबर पलुस्कर की धुन पर इसका परिवर्तित रूप गाया। गांधी जी ने टेक रखी और बीच की पंक्तियाँ अपनी जोड़ीं, जिनमें प्रसिद्ध "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान" भी है। वह रूप सांप्रदायिक सद्भाव का गीत बन गया, जबकि यहाँ दिया पारंपरिक पाठ मंदिरों और राम भक्ति में गाया जाता है।

कब गाएँ

  • सामूहिक भजन और कीर्तन में, विशेषकर समापन धुन के रूप में।
  • राम नवमी पर, रामायण पाठ और अखंड राम-नाम कीर्तन में।
  • गांधी जयंती और प्रार्थना सभाओं में, प्रायः गांधी जी के परिवर्तित रूप में।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रघुपति राघव राजाराम किसने लिखा?

पारंपरिक पाठ लक्ष्मणाचार्य का माना जाता है। गांधी जी का प्रसिद्ध रूप स्वतंत्रता आंदोलन में इसे परिवर्तित करके बना।

"पतित पावन सीताराम" का अर्थ क्या है?

"पतितों को पावन करने वाले सीता और राम।"

क्या "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम" मूल पाठ का अंग है?

नहीं। यह गांधी जी के परिवर्तित रूप का अंग है, जो 1930 के दांडी मार्च में गाया गया।

भजन में भद्रगिरि क्या है?

तेलंगाना में गोदावरी तट पर राम मंदिर वाला नगर भद्राचलम; "भद्रगिरीश्वर" अर्थात भद्रगिरि के स्वामी।

धुन क्या होती है?

समूह में गाने के लिए छोटा, दोहराया जाने वाला भक्ति-कीर्तन, जिसमें टेक बार-बार लौटती है।

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