मूल पाठ
ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां ॥ किलकि-किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय । धाय मात गोद लेत, दशरथ की रनियां ॥ अंचल रज अंग झारि, विविध भांति सो दुलारि । तन मन धन वारि-वारि, कहत मृदु बचनियां ॥ विद्रुम से अरुण अधर, बोलत मुख मधुर-मधुर । सुभग नासिका में चारु, लटकत लटकनियां ॥ तुलसीदास अति आनंद, देख के मुखारविंद । रघुवर छबि के समान, रघुवर छबि बनियां ॥
लिप्यंतरण
Thumak Chalat Ramachandra, Bajat Painjaniyan. Kilaki-kilaki Uthat Dhay, Girat Bhumi Latapatay Dhay Mat God Let, Dasharath Ki Raniyan. Anchal Raj Ang Jhari, Vividh Bhanti So Dulari Tan Man Dhan Vari-vari, Kahat Mridu Bachaniyan. Vidrum Se Arun Adhar, Bolat Mukh Madhur-madhur Subhag Nasika Mein Charu, Latakat Latakaniyan. Tulasidas Ati Anand, Dekh Ke Mukharavind Raghuvar Chhabi Ke Saman, Raghuvar Chhabi Baniyan.
चलना सीखते राम
"ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियाँ" — "रामचंद्र ठुमक-ठुमक चल रहे हैं, पैंजनियाँ बज रही हैं।" ठुमक उस बच्चे की उछलती, डगमगाती चाल है जो अभी चलना सीख रहा है, और पैंजनियाँ उसके पैरों के छोटे घुँघरू हैं। एक पंक्ति में तुलसीदास ब्रह्मांड के स्वामी को अयोध्या के राजमहल के आँगन में चलते शिशु बना देते हैं।
यह पद राम के बाल्यकाल पर तुलसीदास की भक्ति कविता का है (प्रायः उनकी गीतावली से जोड़ा जाता है), और वात्सल्य भाव में गाया जाता है — माता-पिता का संतान के प्रति प्रेम — जो प्रायः कृष्ण से अधिक जुड़ा माना जाता है।
हर पद का दृश्य
- गिरना: किलकारी भरते (किलकि-किलकि) वे दौड़ पड़ते हैं, लड़खड़ाकर भूमि पर गिरते हैं — और दशरथ की रानियाँ दौड़कर उन्हें गोद में उठा लेती हैं।
- दुलार: वे आँचल से उनके अंगों की धूल झाड़ती हैं, भाँति-भाँति से दुलारती हैं, और तन-मन-धन वारती हैं (वारि-वारि, नज़र उतारने का भाव), मीठे वचन कहती हैं।
- मुख: मूँगे जैसे लाल अधर, मधुर-मधुर बोलते मुख; सुंदर नासिका में लटकन झूलता है।
- कवि: "मुखारविंद देखकर तुलसीदास अति आनंदित हैं — रघुवर की छवि के समान बस रघुवर की ही छवि है।"
हमारे पाठ में हर पंक्ति एक बार दी गई है। गाते समय गायक पहली पंक्ति को टेक के रूप में दोहराते हैं और कई अर्धपंक्तियाँ दोहराते हैं, इसीलिए गाए जाने वाले रूप बहुत लंबे दिखते हैं।
गायन की परंपरा
- शास्त्रीय और भक्ति गायकों का प्रिय — डी. वी. पलुस्कर की राग भैरवी में प्रस्तुति प्रसिद्ध है।
- राम नवमी पर, रामायण पाठ के दौरान, और बच्चे के पहले कदम, जन्मदिन व नामकरण पर।
- लोरी के रूप में — इसकी कोमल लय इसके लिए बहुत उपयुक्त है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ठुमक चलत रामचंद्र किसने लिखा?
गोस्वामी तुलसीदास ने, रामचरितमानस के 16वीं शताब्दी के कवि; अंतिम पद में उनका हस्ताक्षर है।
"ठुमक चलत" का क्या अर्थ है?
छोटे बच्चे की उछलती, डगमगाती चाल से चलना।
"पैंजनियाँ" क्या हैं?
घुँघरू वाली छोटी पायल, जो बच्चे के चलने पर बजती है।
यह भजन कब गाया जाता है?
राम नवमी पर, रामायण पाठ में, और बच्चे से जुड़े अवसरों — पहले कदम, जन्मदिन, नामकरण — पर।
गाए जाने वाले रूप इस पाठ से लंबे क्यों हैं?
गायक टेक दोहराते हैं और कई पंक्तियाँ दोहराते हैं; मूल पद यहाँ दिया छोटा पाठ है।
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