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पितृपक्ष 2026क्या खरीदें और क्या न खरीदें

पितृपक्ष (26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026) में परंपरा से किन चीज़ों की खरीदारी टाली जाती है, क्या खरीदना ठीक और उचित है, और महाभारत के अनुसार श्राद्ध में किन खाद्य पदार्थों का उपयोग नहीं होता।

पितृपक्ष 2026: क्या खरीदें और क्या न खरीदें

पितृपक्ष 2026: एक नज़र में

  • आरंभ: शनिवार, 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध); कृष्ण पक्ष का पहला श्राद्ध, प्रतिपदा, रविवार 27 सितंबर को है।
  • समापन: शनिवार, 10 अक्टूबर 2026, सर्वपितृ अमावस्या (महालया अमावस्या)।
  • अगले दिन: रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र आरंभ होंगे, और उसी के साथ त्योहारों की खरीदारी का समय भी।

तिथियाँ द्रिक पंचांग के अनुसार। किसी व्यक्ति का श्राद्ध किस दिन करें, यह जानने के लिए देखें पितृपक्ष: अर्थ, विधि और श्राद्ध।

क्या खरीदारी सचमुच वर्जित है? परंपरा वास्तव में क्या कहती है

पहले यह बात स्पष्ट कर लेना अच्छा है। श्राद्ध का वर्णन करने वाले शास्त्र, जैसे महाभारत के अनुशासन पर्व में पहले श्राद्ध की कथा, बताते हैं कि अनुष्ठान कैसे किया जाए और क्या अर्पित किया जाए। उनमें ऐसी कोई सूची नहीं है कि क्या नहीं खरीदना चाहिए। नई खरीदारी से बचने की प्रथा पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा से आती है, और इसके पीछे एक सरल विचार है: ये पंद्रह दिन पितरों के हैं। यह स्मरण और संयम का समय है, इसलिए नई शुरुआतें और उत्सव, जिन्हें शुभ कार्य माना जाता है, परंपरा से पखवाड़ा बीतने तक टाल दिए जाते हैं।

इसलिए इस प्रथा को "खरीदना पाप है" के बजाय "नई शुरुआत मत करो, उत्सव मत मनाओ, भोग-विलास मत करो" के रूप में समझना बेहतर है। इसका पालन कितनी कड़ाई से होता है, यह हर परिवार और क्षेत्र में बहुत अलग है। यदि आपके परिवार की अपनी कोई रीति है, तो उसी का पालन करें।

परंपरा से किन चीज़ों की खरीदारी टाली जाती है

  • सोना, चाँदी और आभूषण, जो समृद्धि और उत्सव के लिए खरीदे जाते हैं। बहुत से लोग इसके लिए नवरात्र, धनतेरस या दीपावली की प्रतीक्षा करते हैं।
  • अपने लिए नए कपड़े और जूते, विशेषकर त्योहार या विवाह के कपड़े।
  • वाहन: नई कार या दोपहिया।
  • संपत्ति: ज़मीन, फ़्लैट या मकान खरीदना, और संपत्ति की रजिस्ट्री।
  • नए घर में प्रवेश: पितृपक्ष में गृह प्रवेश नहीं किया जाता।
  • घर की बड़ी चीज़ें, जैसे नया फ़र्नीचर या बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान, जब वे ज़रूरत के बजाय उत्सव के लिए हों।
  • शुभ संस्कारों का सामान: चूँकि इस अवधि में विवाह, सगाई, मुंडन और अन्य संस्कार नहीं होते, उनकी खरीदारी भी प्रायः रुक जाती है।

नया व्यापार, नई नौकरी या नई दुकान शुरू करना भी प्रायः सर्वपितृ अमावस्या के बाद तक टाल दिया जाता है।

क्या खरीद सकते हैं, और क्या खरीदना चाहिए

ऊपर की कोई भी प्रथा श्राद्ध के लिए ज़रूरी वस्तुओं, या जीवन की सामान्य आवश्यकताओं पर लागू नहीं होती।

  • श्राद्ध और तर्पण की सारी सामग्री: काले तिल, कुश, जौ, चावल, घी, दूध, दही, शहद, गुड़ या चीनी, और श्राद्ध भोजन के लिए मौसमी सब्ज़ियाँ व फल। पत्तल और अनुष्ठान में उपयोग होने वाले साफ़ या नए बर्तन भी ठीक हैं।
  • दान की वस्तुएँ: पितरों के नाम पर ज़रूरतमंदों या ब्राह्मणों को दिया जाने वाला अनाज, कपड़े, कंबल, जूते-चप्पल, छाते, बर्तन या धन। इन्हें खरीदना इस पर्व का हिस्सा है, उसका उल्लंघन नहीं।
  • रोज़मर्रा की ज़रूरतें: राशन, दवाइयाँ, घर का सामान, स्कूल की किताबें और काम या स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी कोई भी चीज़। कोई भी प्रथा इनके बिना रहने को नहीं कहती।
  • ऐसी वास्तविक ज़रूरतें जो रुक नहीं सकतीं: टूटी हुई चीज़ की जगह नई, या रोज़ी-रोटी के लिए ज़रूरी वाहन या औज़ार। बहुत से पुरोहित सलाह देते हैं कि आवश्यकता पहले आती है; यदि संदेह हो, तो अपने कुल-पुरोहित से पूछ लें।

श्राद्ध में किन खाद्य पदार्थों का उपयोग नहीं होता

यहाँ परंपरा का एक शास्त्रीय स्रोत है। महाभारत (अनुशासन पर्व, अध्याय 91) में ऋषि अत्रि बताते हैं कि श्राद्ध में क्या अर्पित नहीं करना चाहिए। गांगुली के अनुवाद के अनुसार इसमें अन्य चीज़ों के साथ ये शामिल हैं:

  • कोदों (कोद्रव) और पुलक अनाज;
  • हींग, प्याज़ और लहसुन;
  • सहजन (मुनगा) और कचनार;
  • कद्दू और लौकी;
  • काला नमक और बिड़ नमक, और वास्तव में अर्पण में सामान्य रूप से नमक;
  • कलौंजी, सिंघाड़ा और जामुन;
  • सूअर का मांस, और यज्ञ के अतिरिक्त प्राप्त मांस;
  • ऐसा कोई भी भोजन जिस पर किसी ने थूका हो या जिस पर आँसू गिरे हों।

क्षेत्रीय रीतियाँ अलग हैं: कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध भोजन में ऐसे व्यंजन भी बनाते हैं जिन्हें यह सूची छोड़ती है, और बहुत से परिवार पूरे पखवाड़े को सात्विक, प्याज़-लहसुन और मांस से मुक्त रखते हैं। महाभारत का पहला श्राद्ध स्वयं बिना नमक के पके साँवा चावल का भोजन था (देखें निमि के पहले श्राद्ध की कथा)।

सामान्य प्रश्न

क्या पितृपक्ष में ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं? प्रथा खरीदारी के बारे में है, दुकान के बारे में नहीं, इसलिए जो परिवार नई चीज़ें खरीदने से बचते हैं, वे प्रायः ऑनलाइन भी यही नियम मानते हैं। ज़रूरी चीज़ें दोनों तरह से ठीक हैं।

मैंने पहले से कार या आभूषण बुक कर रखे हैं, अब क्या करूँ? बहुत से लोग सर्वपितृ अमावस्या के बाद, नवरात्र के पहले दिन या उसके बाद डिलीवरी लेते हैं। यदि यह संभव न हो, तो अपने कुल-पुरोहित से पूछ लें।

क्या पितरों के लिए कुछ खरीदना, जैसे दान के लिए कपड़े, गलत है? नहीं। उनके नाम पर दान के लिए खरीदारी इस पखवाड़े में किए जा सकने वाले सबसे सार्थक कार्यों में से है।

क्या यह नियम बच्चों या बुज़ुर्गों की ज़रूरतों पर भी लागू होता है? नहीं। किसी बच्चे, बुज़ुर्ग या बीमार व्यक्ति के लिए ज़रूरी कपड़े, दवाइयाँ या कोई और चीज़ टालने को यह प्रथा नहीं कहती।

इसके पीछे की भावना

पितृपक्ष एक ठहराव माँगता है: पंद्रह दिन, जिनमें घर का ध्यान नई चीज़ें पाने से हटकर अपने से पहले आए लोगों के स्मरण पर लगता है। इस प्रथा का सार सूची नहीं, वह ठहराव है। आप कुछ खरीदें या न खरीदें, इस पखवाड़े का हृदय अर्पण, दान और स्मरण है। खरीदारी नवरात्र तक रुक सकती है, जो अगले ही दिन से शुरू होते हैं।

लेखकBhakti Arohan Teamप्रकाशित5 मिनट में पढ़ें

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