Bhakti Arohan
ॐ

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी

वाराणसी का सबसे प्रिय हनुमान मंदिर, अस्सी नदी के किनारे जहाँ माना जाता है कि तुलसीदास को हनुमान के दर्शन हुए: कथा और इतिहास में वास्तव में क्या ज्ञात है, राम की ओर मुख किए हनुमान, दर्शन का समय, मोबाइल पर रोक और लॉकर, बेसन के लड्डू का प्रसाद, मंगलवार-शनिवार की भीड़, अप्रैल का संगीत समारोह और कैसे पहुँचें।

एक नज़र में

  • देवता: संकट मोचन रूप में हनुमान जी, अर्थात् "संकट से छुड़ाने वाले", और उनके सामने श्रीराम का मंदिर।
  • स्थान: संकट मोचन रोड, अस्सी नदी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पास, दक्षिण वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  • परंपरा के अनुसार स्थापना: रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास।
  • प्रबंधन: मंदिर का वंशानुगत महंत परिवार; वर्तमान महंत IIT (BHU) के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र हैं।
  • सबसे अधिक भीड़: मंगलवार और शनिवार, तथा हनुमान जयंती।
  • फ़ोन और कैमरा: भीतर ले जाने की अनुमति नहीं; द्वार पर लॉकर हैं।

तुलसीदास और हनुमान जी के दर्शन

संकट मोचन की हर कथा तुलसीदास से शुरू होती है। यह कथा पहली बार लगभग 1713 में प्रियादास की भक्तमाल टीका में लिखी मिलती है: तुलसीदास को बताया गया कि हनुमान जी रोज़ रामकथा सुनने आते हैं, एक बूढ़े, रोगी व्यक्ति (कई कथाओं में कोढ़ी) के वेश में, जो सबसे पहले आता और सबसे अंत में जाता है। तुलसीदास कथा के बाद उनके पीछे गए और अस्सी के किनारे एक वन-सी जगह में उनके चरणों में गिर पड़े, तब हनुमान जी ने अपना रूप प्रकट किया। माना जाता है कि मंदिर ठीक उसी स्थान पर है, और परंपरा कहती है कि तुलसीदास ने रामचरितमानस का बड़ा भाग यहीं लिखा। अलग-अलग कथाओं में ब्योरे बदलते हैं (तुलसीदास को बूढ़े व्यक्ति के बारे में किसने बताया, ठीक क्या बात हुई), इसलिए इन्हें इतिहास नहीं, भक्त-स्मृति समझें।

जो बात अधिक ठोस है वह यह: गर्भगृह में हनुमान जी की पत्थर की प्रतिमा को फ़िलिप लटगेनडॉर्फ़ जैसे विद्वान तुलसीदास के समय तक की मानते हैं, जबकि आज दिखने वाली अधिकांश इमारतें बीसवीं शताब्दी के मध्य की हैं, जब वाराणसी दक्षिण में BHU की ओर फैला और मंदिर भी उसके साथ बढ़ा। एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि हनुमान जी ने स्वयं तुलसीदास के लिए मिट्टी से यह प्रतिमा बनाई; यह भक्ति-परंपरा है, अभिलेख इसकी पुष्टि नहीं कर सकते।

मंदिर और विग्रह

यहाँ हनुमान जी चमकीले नारंगी सिंदूर से ढके हैं, जैसे पूरे उत्तर भारत में उनकी पूजा होती है। भक्त सबसे पहले जिस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं, वह है कि हनुमान जी आँगन के पार श्रीराम के मंदिर की ओर मुख किए खड़े हैं, मानो सदा अपने प्रभु को निहार रहे हों; एक ही दृश्य में हनुमान की पूरी भक्ति। मंदिर लगभग साढ़े आठ एकड़ के अर्ध-वन क्षेत्र के भीतर है, और वहाँ रहने वाले बंदरों के झुंड इस यात्रा का बड़ा हिस्सा हैं (खाने-पीने की चीज़ें और ढीला सामान छिपाकर रखें)।

संकट मोचन सबसे बढ़कर रामचरितमानस का मंदिर है। भक्त सुबह-शाम विग्रह के सामने इसका पाठ करते हैं, और बहुत-से लोग आँगन में बैठकर हनुमान चालीसा या संकटमोचन हनुमान अष्टक पढ़ते हैं, वे आठ पद जिनसे यहाँ के देवता का लोकप्रिय नाम जुड़ा है। मंदिर लंबे समय से तुलसी घाट की रामलीला को भी सहयोग देता आया है। चूँकि माना जाता है कि हनुमान जी मंगल और शनि के कठोर प्रभाव से रक्षा करते हैं, बहुत-से लोग ज्योतिषीय सलाह पर, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को, यहाँ आते हैं।

दर्शन का समय

मंदिर ऑनलाइन कोई समय-सारणी प्रकाशित नहीं करता, और अलग-अलग जगह बताए गए समय में अंतर है। सामान्यतः बताया जाने वाला समय (अक्टूबर 2026 तक):

  • मंदिर लगभग सुबह 4:30–5 बजे खुलता है और रात लगभग 10–10:30 बजे बंद होता है।
  • दोपहर में कुछ घंटे (लगभग 12 से 3 बजे) दर्शन बंद रहने की बात अक्सर बताई जाती है।
  • मंगलवार और शनिवार को मंदिर देर तक, लगभग आधी रात तक, खुला रहता बताया जाता है।
  • भोर में एक आरती और शाम/रात में आरती होती है; शाम की आरती में दिन की सबसे बड़ी भीड़ होती है।

इन्हें केवल मार्गदर्शन मानें और विशेषकर पर्वों के आसपास, जब दिनचर्या बदलती है, स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

नियम जो जानने चाहिए

  • भीतर मोबाइल फ़ोन और कैमरा वर्जित। कतार में लगने से पहले इन्हें द्वार के बाहर लॉकर में जमा करें; परिसर के भीतर फ़ोटोग्राफ़ी की अनुमति नहीं है।
  • सुरक्षा: 7 मार्च 2006 को संध्या पूजा के समय, जब एक बारात भी मौजूद थी, मंदिर में बम विस्फोट हुआ। भक्तों ने एक-दूसरे की मदद कर बचाव किया और अगली सुबह फिर पूजा शुरू कर दी; तब से मंदिर के भीतर स्थायी पुलिस चौकी है। तलाशी की अपेक्षा रखें और बैग छोटा रखें।
  • वेशभूषा: कोई लिखित ड्रेस कोड प्रकाशित नहीं है, पर यह जीवंत पूजा-स्थल है; शालीन वस्त्र और भीतर नंगे पैर अपेक्षित हैं। जूते-चप्पल बाहर स्टैंड पर रखें।

भोग और प्रसाद

यहाँ का पारंपरिक भोग बेसन के लड्डू हैं, साथ में सिंदूर, गेंदे की माला और तुलसी। प्रसाद सड़क के फेरीवालों से नहीं, मंदिर परिसर के भीतर की दुकानों से लें। बहुत-से भक्त मन्नत के रूप में मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को चोला (सिंदूर और तेल) भी चढ़ाते हैं।

संकट मोचन संगीत समारोह

हर अप्रैल, हनुमान जयंती के आसपास, मंदिर में संकट मोचन संगीत समारोह होता है, लगभग छह रातों का शास्त्रीय संगीत और नृत्य उत्सव। यह दो बातों में अनोखा है: सबके लिए प्रवेश निःशुल्क है, और कलाकार, जिनमें हिंदुस्तानी संगीत और शास्त्रीय नृत्य के बड़े-बड़े नाम होते हैं, कोई शुल्क लिए बिना हनुमान जी को अपनी कला अर्पित करते हैं। यह उत्सव सौ वर्ष से अधिक पुराना है; इसका 102वाँ आयोजन 16 से 21 अप्रैल 2025 तक हुआ। कार्यक्रम मंदिर के आँगन में रात भर चलते हैं, इसलिए देर से आएँ और धैर्य रखें। फ़ोन का नियम तब भी लागू रहता है।

पर्व

  • हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) वर्ष का सबसे बड़ा दिन है, और संगीत समारोह इसी के आसपास होता है।
  • साल भर मंगलवार और शनिवार को, विशेषकर शाम को, लंबी कतारें लगती हैं।
  • विशेष अवसरों पर रात भर रामचरितमानस का पाठ होता है, जिसमें शहर भर की मंडलियाँ बारी-बारी से गाती हैं।

कैसे पहुँचें

  • रेल: बनारस स्टेशन (पूर्व नाम मंडुवाडीह) सबसे पास का बड़ा स्टेशन है, कुछ किलोमीटर दूर; वाराणसी जंक्शन (कैंट) लगभग 6–7 किमी है। मंदिर तक ऑटो और ई-रिक्शा मिलते हैं।
  • हवाई मार्ग: बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 25–30 किमी दूर है, सड़क से प्रायः 45 मिनट से एक घंटा।
  • शहर के भीतर: यह BHU, दुर्गा कुंड और तुलसी मानस मंदिर के पास है और अस्सी घाट से लगभग 2 किमी, इसलिए दक्षिण वाराणसी की एक सुबह में आसानी से शामिल हो जाता है। काशी विश्वनाथ शहर के दूसरे हिस्से में, दशाश्वमेध घाट के पास है।

व्यावहारिक सुझाव

  • शांत दर्शन के लिए किसी कार्यदिवस की सुबह जल्दी आएँ; भीड़ से बचना हो तो मंगलवार और शनिवार की शाम न चुनें।
  • कतार में लगने से पहले फ़ोन लॉकर में रखें, या बेहतर हो कि होटल में ही छोड़ आएँ।
  • चश्मा, प्रसाद और बैग संभालकर रखें; बंदर बहुत फुर्तीले हैं।
  • पास के दुर्गा कुंड और तुलसी मानस मंदिर भी देखें, और शाम अस्सी घाट पर बिताएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संकट मोचन मंदिर का समय क्या है?

मंदिर प्रायः सुबह लगभग 4:30–5 बजे खुलता है और रात लगभग 10–10:30 बजे बंद होता है; दोपहर में विराम और मंगलवार-शनिवार को देर तक खुलने की बात बताई जाती है। मंदिर ऑनलाइन समय-सारणी प्रकाशित नहीं करता, इसलिए जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि करें।

संकट मोचन मंदिर की स्थापना किसने की?

परंपरा के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास ने, जिन्हें माना जाता है कि इसी स्थान पर हनुमान जी के दर्शन हुए। भीतर की प्रतिमा प्राचीन है, पर वर्तमान इमारतें अधिकतर बीसवीं शताब्दी की हैं।

क्या संकट मोचन मंदिर में मोबाइल ले जा सकते हैं?

नहीं। फ़ोन और कैमरा भीतर ले जाने की अनुमति नहीं है और फ़ोटोग्राफ़ी वर्जित है। प्रवेश द्वार पर लॉकर की सुविधा है।

संकट मोचन जाने का सबसे अच्छा दिन कौन-सा है?

मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन हैं और सबसे शुभ माने जाते हैं, पर इन्हीं दिनों सबसे अधिक भीड़ भी होती है। आराम से दर्शन के लिए किसी कार्यदिवस की सुबह सबसे अच्छी है।

संकट मोचन में कौन-सा प्रसाद चढ़ता है?

बेसन के लड्डू पारंपरिक प्रसाद हैं, जिन्हें मंदिर परिसर के भीतर की दुकानों से लेना सबसे अच्छा है; साथ में सिंदूर और गेंदे की माला।

संकट मोचन संगीत समारोह कब होता है?

हर अप्रैल में हनुमान जयंती के आसपास, लगभग छह रातों तक। प्रवेश निःशुल्क है और कलाकार बिना शुल्क अपनी कला अर्पित करते हैं।

संकट मोचन मंदिर काशी विश्वनाथ से कितनी दूर है?

सड़क से लगभग 5 किमी, शहर के दक्षिण में BHU के पास। ट्रैफ़िक के अनुसार ऑटो से 20–40 मिनट लगते हैं।

इस मंदिर में हनुमान जी श्रीराम की ओर मुख किए क्यों हैं?

श्रीराम का मंदिर हनुमान जी के ठीक सामने इसलिए है कि वे सदा अपने प्रभु को निहारते रहें; यही वह भक्ति है जिसके लिए संकट मोचन इतना प्रिय है।

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