Bhakti Arohan
ॐ

हनुमान जयंती

अंजना और केसरी तथा पवनदेव के पुत्र हनुमान जी का जन्मोत्सव: उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को, और आन्ध्र, तमिलनाडु व कर्नाटक में अलग तिथियों पर। सूर्योदय पूजा, सिन्दूर, हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड।

यह कब पड़ती है — और तिथियाँ अलग क्यों हैं

उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, सामान्यतः मार्च के अन्त या अप्रैल में, राम नवमी के लगभग एक सप्ताह बाद। अन्य क्षेत्रों की अपनी तिथियाँ हैं:

  • आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना: वैशाख कृष्ण दशमी को, लगभग चालीस दिन बाद; बहुत-से भक्त चैत्र पूर्णिमा से आरम्भ होकर इसी दिन समाप्त होने वाली 41 दिन की दीक्षा रखते हैं।
  • तमिलनाडु और केरल: हनुमत जयन्ती तमिल मास मार्गळि की अमावस्या को, दिसम्बर–जनवरी में, मूल नक्षत्र में पड़ती है।
  • कर्नाटक: हनुमान व्रतम् मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को रखा जाता है।
  • उत्तर भारत की कुछ परम्पराएँ, अयोध्या सहित, उनका जन्मोत्सव कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी — दीपावली से एक दिन पहले — भी मनाती हैं।

बहुत-से भक्त जयंती की जगह हनुमान जन्मोत्सव कहना पसन्द करते हैं, क्योंकि हनुमान जी चिरंजीवी हैं, जिनके आज भी पृथ्वी पर होने की मान्यता है।

हनुमान जी का जन्म

हनुमान जी का जन्म अंजना — शापवश पृथ्वी पर रह रही एक अप्सरा — और वानरराज केसरी के यहाँ हुआ। पवनदेव उनके दिव्य पिता हैं, इसीलिए वे पवनपुत्र, मारुति और आंजनेय कहलाते हैं। रामायण का किष्किन्धाकाण्ड बताता है कि शिशु रूप में उन्होंने उगते सूर्य को पका फल समझकर उस पर छलाँग लगाई; इन्द्र का वज्र उनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा, जिससे उनका नाम पड़ा, और फिर देवताओं ने उन्हें बल, बुद्धि और अमरता का वर दिया। नासिक के पास अंजनेरी से लेकर हम्पी के पास अंजनाद्रि और तिरुमला तक अनेक स्थान उनकी जन्मभूमि के रूप में पूजे जाते हैं।

कैसे मनाई जाती है

  1. प्रातः आरम्भ: मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ, इसलिए मन्दिर भोर से पहले खुल जाते हैं और मुख्य पूजा व आरती प्रातःकाल होती है।
  2. सिन्दूर और चोला: प्रतिमा पर चमेली के तेल में मिला सिन्दूर — चोला — चढ़ाया जाता है, और लाल वस्त्र व फूलों की माला अर्पित की जाती है। यह परम्परा उस कथा की याद दिलाती है कि सीता जी को श्रीराम की दीर्घायु के लिए सिन्दूर लगाते देखकर हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लिया।
  3. भोग: बेसन या बूँदी के लड्डू, गुड़ और भुने चने, केले, और पान।
  4. पाठ: हनुमान चालीसा — बहुत-से लोग 11, 21 या 108 बार पढ़ते हैं — रामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड, संकटमोचन हनुमान अष्टक और बजरंग बाण।
  5. आरती: आरती कीजै हनुमान लला की। पूरे क्रम के लिए हनुमान पूजा विधि देखें।

बहुत-से भक्त दिन भर व्रत रखते हैं और आजीवन ब्रह्मचारी हनुमान जी के स्वभाव के अनुरूप ब्रह्मचर्य और सादा भोजन रखते हैं। अनेक नगरों में हनुमान जी की प्रतिमा और भगवा ध्वजों के साथ शोभायात्राएँ, और अखाड़ों में कुश्ती इस दिन का भाग हैं।

हनुमान जी इतने व्यापक रूप से क्यों पूजे जाते हैं

हनुमान जी श्रीराम के आदर्श भक्त, संकटमोचन, और भय, रोग व बुरे प्रभावों से रक्षक के रूप में प्रिय हैं। शनि के प्रभाव को शान्त करने के लिए भी उनकी पूजा होती है, उस कथा के कारण जिसमें उन्होंने शनिदेव को रावण की कैद से छुड़ाया। वर्ष भर मंगलवार और शनिवार उनके दिन हैं; मंगलवार व्रत और मंगलवार हनुमान भक्ति देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को। आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना वैशाख कृष्ण दशमी को, तमिलनाडु मार्गळि अमावस्या को, और कर्नाटक मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को मनाते हैं।

इसे हनुमान जन्मोत्सव क्यों कहते हैं?

क्योंकि हनुमान जी चिरंजीवी हैं, जिनके आज भी जीवित होने की मान्यता है। "जयंती" प्रायः दिवंगत व्यक्ति की जन्म-वर्षगाँठ के लिए प्रयुक्त होती है, इसलिए बहुत-से लोग "जन्मोत्सव" कहना पसन्द करते हैं।

हनुमान जी के माता-पिता कौन थे?

अंजना और केसरी; पवनदेव उनके दिव्य पिता हैं।

हनुमान जी को सिन्दूर क्यों चढ़ाते हैं?

कथा है कि उन्होंने सीता जी को श्रीराम की दीर्घायु के लिए सिन्दूर लगाते देखा और रामभक्ति में पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लिया। चमेली के तेल में सिन्दूर उनका पारम्परिक चढ़ावा है।

हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें?

श्रद्धा से कितनी भी बार; 7, 11, 21 या 108 पाठ सामान्य संकल्प हैं।

क्या महिलाएँ हनुमान जयंती पर हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ हनुमान जी की पूजा करती हैं और चालीसा पढ़ती हैं। कुछ परम्पराएँ महिलाओं से प्रतिमा को स्पर्श न करने या स्वयं चोला न चढ़ाने को कहती हैं; अपने मन्दिर की परम्परा मानें।

कोई त्रुटि दिखे?

यदि आपको इस पृष्ठ पर व्याकरण, हिंदी, अंग्रेज़ी, मंत्र-पाठ या किसी भी प्रकार की त्रुटि दिखे, तो हमें बताएँ — हम 24 घंटे में उसे ठीक कर देंगे।

संबंधित सामग्री