श्रीभगवानुवाच । इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥ १ ॥
śhrī bhagavān uvācha idaṁ tu te guhyatamaṁ pravakṣhyāmyanasūyave jñānaṁ vijñāna-sahitaṁ yaj jñātvā mokṣhyase ’śhubhāt
हिंदी अर्थ
श्रीभगवान बोले: तुझ दोष-दृष्टि रहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली-भाँति कहूँगा, जिसे जानकर तू दुख रूप संसार से मुक्त हो जाएगा।
भावार्थ
श्रीकृष्ण अर्जुन को "अनसूयवे" — ईर्ष्या या दोष-दृष्टि से रहित — कहते हैं। गहनतम शिक्षा केवल उसी को दी जा सकती है जो उसे बिना द्वेष के ग्रहण करे। नौवें अध्याय को प्रायः भक्ति पर गीता की शिक्षा का हृदय माना जाता है।