अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥ ४२ ॥
atha vā yoginām eva kule bhavati dhīmatām etad dhi durlabhataraṁ loke janma yad īdṛiśham
हिंदी अर्थ
अथवा वह बुद्धिमान योगियों के ही कुल में जन्म लेता है; परंतु इस प्रकार का जो यह जन्म है, वह संसार में निःसंदेह अत्यंत दुर्लभ है।
भावार्थ
इससे भी बड़ा आशीर्वाद: आध्यात्मिक रूप से ज्ञानी लोगों के बीच जन्म लेना, जहाँ मार्ग बचपन से ही दैनिक जीवन का अंग हो। श्रीकृष्ण ऐसे जन्म को "दुर्लभतरम्" — अत्यंत दुर्लभ — कहते हैं।