तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥ १९ ॥
tasmād asaktaḥ satataṁ kāryaṁ karma samāchara asakto hyācharan karma param āpnoti pūruṣhaḥ
हिंदी अर्थ
इसलिए तुम निरंतर आसक्ति से रहित होकर कर्तव्य-कर्म का भली-भाँति आचरण करो; क्योंकि आसक्ति से रहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त होता है।
भावार्थ
अब तक के अध्याय का व्यावहारिक निष्कर्ष: "कार्यं कर्म" — जो करना चाहिए वह करो — "असक्तः", आसक्ति के बिना। उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण कहते हैं यही परम तक ले जाता है। इस भाव से किया गया दैनिक कर्म स्वयं एक आध्यात्मिक मार्ग है।