यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् । उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ॥ १० ॥
yāta-yāmaṁ gata-rasaṁ pūti paryuṣhitaṁ cha yat uchchhiṣhṭam api chāmedhyaṁ bhojanaṁ tāmasa-priyam
हिंदी अर्थ
जो भोजन अधपका (या बहुत देर पहले बना), रस-रहित, दुर्गंधयुक्त, बासी, जूठा और अपवित्र है, वह तामसी पुरुषों को प्रिय होता है।
भावार्थ
तामसी आहार का जीवन-तत्त्व समाप्त हो चुका होता है: "यातयाम" (शाब्दिक अर्थ: एक पहर, यानी तीन घंटे बीता हुआ), रस-रहित, सड़ा हुआ, रात भर रखा हुआ, या दूसरों का जूठा। वह व्यक्ति को भारी और सुस्त बनाता है। अनेक परंपराएँ "अमेध्य" (अपवित्र) में मांस और मादक पदार्थों को भी गिनती हैं, हालाँकि श्लोक स्वयं इन्हें नहीं गिनाता।
