Bhakti Arohan
ॐ

भगवद्गीता — अध्याय 17, श्लोक 1

श्रद्धात्रयविभागयोग

अर्जुन उवाच । ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः । तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥ १ ॥

arjuna uvācha ye śhāstra-vidhim utsṛijya yajante śhraddhayānvitāḥ teṣhāṁ niṣhṭhā tu kā kṛiṣhṇa sattvam āho rajas tamaḥ

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे कृष्ण! जो लोग शास्त्र-विधि को छोड़कर श्रद्धा से युक्त होकर पूजा करते हैं, उनकी स्थिति कैसी है? सात्त्विक, राजसी या तामसी?

भावार्थ

अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभाग योग (तीन प्रकार की श्रद्धा के विभाग का योग), 16.23–24 से उठे एक विचारशील प्रश्न से शुरू होता है। अनेक सच्चे लोग शास्त्रों को विस्तार से जाने बिना पूजा करते हैं। क्या वे उन लोगों के बराबर हैं जो कामना के कारण शास्त्र को छोड़ देते हैं? अर्जुन कृष्ण से अध्याय 14 के गुणों के आधार पर श्रद्धा को परखने को कहते हैं।