तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ । ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥ २४ ॥
tasmāch chhāstraṁ pramāṇaṁ te kāryākārya-vyavasthitau jñātvā śhāstra-vidhānoktaṁ karma kartum ihārhasi
हिंदी अर्थ
इसलिए कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय करने में शास्त्र ही तुम्हारे लिए प्रमाण है। शास्त्र की विधि को जानकर तुम्हें इस लोक में कर्म करना चाहिए।
भावार्थ
अध्याय "शास्त्रं प्रमाणम्" (शास्त्र ही प्रमाण है) कहकर समाप्त होता है। यह सीधे अध्याय 17 के आरंभ में अर्जुन के प्रश्न की ओर ले जाता है: उन लोगों का क्या जिनमें श्रद्धा है पर जो शास्त्र का पालन नहीं करते? गीता सच्ची श्रद्धा को खारिज नहीं करती; वह आगे उसकी सावधानी से जाँच करती है।
