यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः । न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥ २३ ॥
yaḥ śhāstra-vidhim utsṛijya vartate kāma-kārataḥ na sa siddhim avāpnoti na sukhaṁ na parāṁ gatim
हिंदी अर्थ
जो शास्त्र की विधि को छोड़कर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धि पाता है, न सुख, और न परम गति।
भावार्थ
"कामकारतः" का अर्थ है "मनमाने ढंग से" आचरण करना। कृष्ण चेतावनी देते हैं कि केवल अपने आवेगों पर चलना, चाहे कितना भी स्वतंत्र लगे, सिद्धि तो दूर, सुख तक भी नहीं ले जाता। शास्त्र को संचित ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो हमें हमारी अपनी अंधी जगहों से बचाता है।
