यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् । यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ॥ १२ ॥
yad āditya-gataṁ tejo jagad bhāsayate ’khilam yach chandramasi yach chāgnau tat tejo viddhi māmakam
हिंदी अर्थ
जो तेज सूर्य में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, और जो तेज चंद्रमा में तथा अग्नि में है, उस तेज को तुम मेरा ही जानो।
भावार्थ
श्लोक 12–15 बताते हैं कि ईश्वर हर क्षण संसार को कैसे धारण करते हैं। पहले प्रकाश: सूर्य, चंद्रमा और अग्नि, जो श्लोक 6 में परम धाम को प्रकाशित नहीं कर सकते थे, वे स्वयं ईश्वर के तेज से ही चमकते हैं। यह 7.8 और 10.21 की ओर लौटता है, जहाँ कृष्ण स्वयं को सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश बताते हैं।
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