Bhakti Arohan
ॐ

भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 29

क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः । यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ २९ ॥

prakṛityaiva cha karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśhaḥ yaḥ paśhyati tathātmānam akartāraṁ sa paśhyati

हिंदी अर्थ

जो देखता है कि सब कर्म सब प्रकार से प्रकृति के द्वारा ही किए जाते हैं, और आत्मा अकर्ता है, वही वास्तव में देखता है।

भावार्थ

यह दूसरा "स पश्यति" श्लोक है। यह 3.27 से जुड़ता है, जहाँ अहंकार प्रकृति के कर्मों को अपना समझ लेता है। आत्मा "अकर्ता" है। यह गैर-ज़िम्मेदारी का बहाना नहीं। यह "मैं ही सब कुछ करता हूँ" की चिंता से मुक्त करता है।