यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः । धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥ ४६ ॥
yadi mām apratīkāram aśhastraṁ śhastra-pāṇayaḥ dhārtarāṣhṭrā raṇe hanyus tan me kṣhemataraṁ bhavet
हिंदी अर्थ
यदि शस्त्रधारी धृतराष्ट्र-पुत्र मुझ शस्त्रहीन और प्रतिकार न करने वाले को रण में मार डालें, तो वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।
भावार्थ
अर्जुन अपने तर्क के अंत पर पहुँचते हैं: वे लड़ने के बजाय मर जाना पसंद करेंगे। युद्धभूमि पर खड़े एक क्षत्रिय के लिए यह असाधारण कथन है। यही दूसरे अध्याय के प्रसिद्ध आरंभ की भूमिका है, जहाँ श्रीकृष्ण उनसे स्पष्ट कहते हैं कि इस हृदय की दुर्बलता को त्यागकर उठ खड़े हो।