Bhakti Arohan
ॐ

नवरात्रि

देवी की नौ रातें, जो वर्ष में दो बार चैत्र और आश्विन में मनाई जाती हैं: चारों नवरात्रियाँ, घटस्थापना, दिन-प्रतिदिन दुर्गा के नौ रूप, व्रत, कन्या पूजन, और गुजरात, बंगाल व दक्षिण भारत में इसे मनाने के ढंग।

वर्ष में चार नवरात्रियाँ

नवरात्रि — "नौ रातें" — शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चलती है। यह वर्ष में चार बार आती है, पर दो ही बड़े सार्वजनिक पर्व हैं:

  • चैत्र नवरात्रि (मार्च–अप्रैल), उत्तर भारत में हिन्दू नववर्ष के आरम्भ पर; इसका नौवाँ दिन राम नवमी है।
  • शारदीय नवरात्रि (सितम्बर–अक्टूबर), आश्विन मास में; यह दसवें दिन दशहरे के साथ समाप्त होती है। "नवरात्रि" कहने पर अधिकतर लोगों का आशय यही होता है।
  • गुप्त नवरात्रियाँ माघ और आषाढ़ में, जिन्हें शाक्त और तान्त्रिक साधक शान्त भाव से मनाते हैं।

इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि की तिथियों और मुहूर्तों के लिए शारदीय नवरात्रि 2026 देखें।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) बताता है कि महिषासुर नाम के भैंसे के रूप वाले असुर ने वर पाया कि कोई पुरुष या देवता उसे नहीं मार सकेगा, और उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। देवताओं का संयुक्त क्रोध देवी दुर्गा के रूप में प्रकट हुआ, जो उनके सभी अस्त्रों से सुसज्जित थीं; उन्होंने नौ दिन उससे युद्ध किया और दसवें दिन — विजयादशमी को — उसका वध किया। नौ रातें उनके इस युद्ध और उसी ग्रन्थ में वर्णित शुम्भ, निशुम्भ आदि असुरों पर देवी की विजय का सम्मान हैं। उत्तर भारत में आश्विन नवरात्रि श्रीराम से भी जुड़ी है, जिन्होंने रावण से युद्ध से पहले देवी की उपासना की — इसीलिए इन रातों में रामलीला होती है, जो दशहरे पर समाप्त होती है।

घटस्थापना: कलश स्थापना

पहले दिन प्रातः शुभ मुहूर्त में जल से भरा कलश देवी के आसन के रूप में स्थापित किया जाता है, प्रायः मिट्टी पर जिसमें जौ बोए जाते हैं, जो नौ दिनों में अंकुरित होते हैं। अनेक घरों में अखण्ड ज्योति — नौ दिन लगातार जलने वाला दीपक — जलाई जाती है। विधि नवरात्रि कलश स्थापना, व्रत और पूजा विधि में दी गई है।

दुर्गा के नौ रूप

हर दिन नवदुर्गा — देवी के नौ रूपों — में से एक को समर्पित है:

  1. माँ शैलपुत्री
  2. माँ ब्रह्मचारिणी
  3. माँ चन्द्रघण्टा
  4. माँ कूष्माण्डा
  5. माँ स्कन्दमाता
  6. माँ कात्यायनी
  7. माँ कालरात्रि
  8. माँ महागौरी
  9. माँ सिद्धिदात्री

हर पृष्ठ पर उस दिन की पूजा, रंग, भोग और मंत्र दिए गए हैं।

व्रत और दैनिक पूजा

बहुत-से लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं; अन्य पहले और अन्तिम दिन, या अष्टमी को। व्रत में सामान्यतः फल, दूध, और कुट्टू, सिंघाड़ा, सामक चावल, साबूदाना व आलू जैसे व्रत के भोजन लिए जाते हैं, साधारण नमक की जगह सेंधा नमक के साथ, और प्याज़, लहसुन व अनाज के बिना। दैनिक पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ — या छोटे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र या दुर्गा सप्तश्लोकी — नवार्ण मंत्र, दुर्गा चालीसा, और अम्बे तू है जगदम्बे काली या जय अम्बे गौरी आरती होती है।

कन्या पूजन

अष्टमी या नवमी को देवी का रूप मानी जाने वाली नौ कन्याओं (सामान्यतः दो से दस वर्ष की) को घर बुलाया जाता है। उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाकर लाल चुनरी दी जाती है, हलवा, पूरी और काले चने खिलाए जाते हैं, और विदा करते समय उपहार दिए जाते हैं; प्रायः एक बालक को भी भैरव या लांगुर के रूप में शामिल किया जाता है। बहुत-से परिवार कन्या पूजन के बाद नवरात्रि का व्रत खोलते हैं।

देश भर में कैसे मनाई जाती है

  • गुजरात: नौ रातों तक गरबा और डांडिया रास, देवी के दीपक या प्रतिमा के चारों ओर घेरे में।
  • बंगाल और पूर्वी भारत: दुर्गा पूजा — पण्डालों में लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय सहित दुर्गा की प्रतिमाएँ, षष्ठी से विजयादशमी तक, जब प्रतिमाओं का विसर्जन होता है।
  • तमिलनाडु, कर्नाटक और आन्ध्र: गोलु या बोम्मई कोलु — गुड़ियों की सीढ़ीनुमा सजावट; नवमी को पुस्तकों और औज़ारों (आयुध पूजा) के साथ सरस्वती पूजा।
  • उत्तर भारत: रामलीला और देवी मन्दिरों में मेले, दशहरे पर रावण-दहन के साथ समापन; वैष्णो देवी में सबसे बड़ी भीड़।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्ष में कितनी नवरात्रियाँ होती हैं?

चार: चैत्र और शारदीय, दो प्रमुख, और माघ व आषाढ़ में दो गुप्त नवरात्रियाँ।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

महिषासुर के साथ देवी दुर्गा के नौ दिन के युद्ध और दसवें दिन उनकी विजय के लिए, और उनके नौ रूपों की उपासना के लिए।

नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, और सेंधा नमक से बने कुट्टू, सिंघाड़ा, सामक चावल, साबूदाना और आलू जैसे व्रत के भोजन। अनाज, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ किया जाता है।

कन्या पूजन कब किया जाता है?

परिवार की परम्परा के अनुसार अष्टमी या नवमी को।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या अन्तर है?

दोनों देवी की उपासना हैं। चैत्र नवरात्रि वसन्त में आती है और राम नवमी पर समाप्त होती है; शारदीय नवरात्रि शरद में आती है और उसके बाद दशहरा होता है। शारदीय नवरात्रि बड़ा सार्वजनिक पर्व है।

पूरे नौ दिन व्रत न रख सकूँ तो?

कोई बात नहीं। बहुत-से लोग पहले और अन्तिम दिन, या केवल अष्टमी को व्रत रखते हैं और दैनिक पूजा करते रहते हैं।

कोई त्रुटि दिखे?

यदि आपको इस पृष्ठ पर व्याकरण, हिंदी, अंग्रेज़ी, मंत्र-पाठ या किसी भी प्रकार की त्रुटि दिखे, तो हमें बताएँ — हम 24 घंटे में उसे ठीक कर देंगे।

संबंधित सामग्री