Bhakti Arohan
ॐ

खाटू श्याम चालीसा

सीकर (राजस्थान) के खाटू धाम में गाया जाने वाला श्याम चालीसा। इसमें घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की कथा है, जिन्होंने हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन दिया, महाभारत युद्ध से पहले कृष्ण को अपना शीश दान किया, और "हारे का सहारा" श्याम के रूप में पूजे जाने का वर पाया।

खाटू श्याम चालीसा

मूल पाठ

॥ दोहा ॥ श्री गुरु पदरज शीशधर प्रथम सुमिरू गणेश ॥ ध्यान शारदा ह्रदयधर भजुँ भवानी महेश ॥ चरण शरण विप्लव पड़े हनुमत हरे कलेश । श्याम चालीसा भजत हुँ जयति खाटू नरेश ॥ ॥ चौपाई ॥ वन्दहुँ श्याम प्रभु दुःख भंजन । विपत विमोचन कष्ट निकंदन ॥1॥ सांवल रूप मदन छविहारी । केशर तिलक भाल दुतिकारी ॥2॥ मौर मुकुट केसरिया बागा । गल वैजयंति चित अनुरागा ॥3॥ नील अश्व मौरछडी प्यारी । करतल त्रय बाण दुःख हारी ॥4॥ सूर्यवर्च वैष्णव अवतारे । सुर मुनि नर जन जयति पुकारे ॥5॥ पिता घटोत्कच मोर्वी माता । पाण्डव वंशदीप सुखदाता ॥6॥ बर्बर केश स्वरूप अनूपा । बर्बरीक अतुलित बल भूपा ॥7॥ कृष्ण तुम्हे सुह्रदय पुकारे । नारद मुनि मुदित हो निहारे ॥8॥ मौर्वे पूछत कर अभिवन्दन । जीवन लक्ष्य कहो यदुनन्दन ॥9॥ गुप्त क्षेत्र देवी अराधना । दुष्ट दमन कर साधु साधना ॥10॥ बर्बरीक बाल ब्रह्मचारी । कृष्ण वचन हर्ष शिरोधारी ॥11॥ तप कर सिद्ध देवियाँ कीन्हा । प्रबल तेज अथाह बल लीन्हा ॥12॥ यज्ञ करे विजय विप्र सुजाना । रक्षा बर्बरीक करे प्राना ॥13॥ नव कोटि दैत्य पलाशि मारे । नागलोक वासुकि भय हारे ॥14॥ सिद्ध हुआ चँडी अनुष्ठाना । बर्बरीक बलनिधि जग जाना ॥15॥ वीर मोर्वेय निजबल परखन । चले महाभारत रण देखन ॥16॥ माँगत वचन माँ मोर्वि अम्बा । पराजित प्रति पाद अवलम्बा ॥17॥ आगे मिले माधव मुरारे । पूछे वीर क्युँ समर पधारे ॥18॥ रण देखन अभिलाषा भारी । हारे का सदैव हितकारी ॥19॥ तीर एक तीहुँ लोक हिलाये । बल परख श्री कृष्ण सँकुचाये ॥20॥ यदुपति ने माया से जाना । पार अपार वीर को पाना ॥21॥ धर्म युद्ध की देत दुहाई । माँगत शीश दान यदुराई ॥22॥ मनसा होगी पूर्ण तिहारी । रण देखोगे कहे मुरारी ॥23॥ शीश दान बर्बरीक दीन्हा । अमृत बर्षा सुरग मुनि कीन्हा ॥24॥ देवी शीश अमृत से सींचत । केशव धरे शिखर जहँ पर्वत ॥25॥ जब तक नभ मण्डल मे तारे । सुर मुनि जन पूजेंगे सारे ॥26॥ दिव्य शीश मुद मंगल मूला । भक्तन हेतु सदा अनुकूला ॥27॥ रण विजयी पाण्डव गर्वाये । बर्बरीक तब न्याय सुनाये ॥28॥ सर काटे था चक्र सुदर्शन । रणचण्डी करती लहू भक्षन ॥29॥ न्याय सुनत हर्षित जन सारे । जग में गूँजे जय जयकारे ॥30॥ श्याम नाम घनश्याम दीन्हा । अजर अमर अविनाशी कीन्हा ॥31॥ जन हित प्रकटे खाटू धामा । लख दाता दानी प्रभु श्यामा ॥32॥ खाटू धाम मौक्ष का द्वारा । श्याम कुण्ड बहे अमृत धारा ॥33॥ शुदी द्वादशी फाल्गुण मेला । खाटू धाम सजे अलबेला ॥34॥ एकादशी व्रत ज्योत द्वादशी । सबल काय परलोक सुधरशी ॥35॥ खीर चूरमा भोग लगत हैं । दुःख दरिद्र कलेश कटत हैं ॥36॥ श्याम बहादुर सांवल ध्याये । आलु सिँह ह्रदय श्याम बसाये ॥37॥ मोहन मनोज विप्लव भाँखे । श्याम धणी म्हारी पत राखे ॥38॥ नित प्रति जो चालीसा गावे । सकल साध सुख वैभव पावे ॥39॥ श्याम नाम सम सुख जग नाहीं । भव भय बन्ध कटत पल माहीं ॥40॥ ॥ दोहा ॥ त्रिबाण दे त्रिदोष मुक्ति दर्श दे आत्म ज्ञान । चालीसा दे प्रभु भुक्ति सुमिरण दे कल्यान ॥ खाटू नगरी धन्य हैं श्याम नाम जयगान । अगम अगोचर श्याम हैं विरदहिं स्कन्द पुरान ॥

लिप्यंतरण

Doha: Shri Guru Padraj Sheeshdhar Pratham Sumiru Ganesh. Dhyan Sharada Hridaydhar Bhajun Bhavani Mahesh. Charan Sharan Viplav Pade Hanumat Hare Kalesh. Shyam Chalisa Bhajat Hun Jayati Khatu Naresh. Chaupai: 1. Vandahun Shyam Prabhu Dukh Bhanjan, Vipat Vimochan Kasht Nikandan. 2. Sanwal Roop Madan Chhavihari, Keshar Tilak Bhaal Dutikari. 3. Maur Mukut Kesariya Baga, Gal Vaijayanti Chit Anuraga. 4. Neel Ashv Maurchhadi Pyari, Kartal Tray Baan Dukh Hari. 5. Suryavarch Vaishnav Avatare, Sur Muni Nar Jan Jayati Pukare. 6. Pita Ghatotkach Morvi Mata, Pandav Vanshdeep Sukhdata. 7. Barbar Kesh Swaroop Anupa, Barbarik Atulit Bal Bhupa. 8. Krishna Tumhe Suhriday Pukare, Narad Muni Mudit Ho Nihare. 9. Maurve Poochhat Kar Abhivandan, Jeevan Lakshya Kaho Yadunandan. 10. Gupt Kshetra Devi Aradhana, Dusht Daman Kar Sadhu Sadhana. 11. Barbarik Baal Brahmachari, Krishna Vachan Harsh Shirodhari. 12. Tap Kar Siddh Deviyan Kinha, Prabal Tej Athah Bal Linha. 13. Yagya Kare Vijay Vipra Sujana, Raksha Barbarik Kare Prana. 14. Nav Koti Daitya Palashi Mare, Naaglok Vasuki Bhay Hare. 15. Siddh Hua Chandi Anushthana, Barbarik Balnidhi Jag Jana. 16. Veer Morvey Nijbal Parkhan, Chale Mahabharat Ran Dekhan. 17. Mangat Vachan Maa Morvi Amba, Parajit Prati Paad Avalamba. 18. Aage Mile Madhav Murare, Poochhe Veer Kyun Samar Padhare. 19. Ran Dekhan Abhilasha Bhari, Haare Ka Sadaiv Hitkari. 20. Teer Ek Teehun Lok Hilaye, Bal Parakh Shri Krishna Sankuchaye. 21. Yadupati Ne Maya Se Jana, Paar Apaar Veer Ko Pana. 22. Dharm Yuddh Ki Det Duhai, Mangat Sheesh Daan Yadurai. 23. Mansa Hogi Poorn Tihari, Ran Dekhoge Kahe Murari. 24. Sheesh Daan Barbarik Dinha, Amrit Barsha Surag Muni Kinha. 25. Devi Sheesh Amrit Se Seenchat, Keshav Dhare Shikhar Jahan Parvat. 26. Jab Tak Nabh Mandal Me Tare, Sur Muni Jan Pujenge Sare. 27. Divya Sheesh Mud Mangal Moola, Bhaktan Hetu Sada Anukoola. 28. Ran Vijayi Pandav Garvaye, Barbarik Tab Nyay Sunaye. 29. Sar Kaate Tha Chakra Sudarshan, Ranchandi Karti Lahu Bhakshan. 30. Nyay Sunat Harshit Jan Sare, Jag Mein Goonje Jai Jaikare. 31. Shyam Naam Ghanshyam Dinha, Ajar Amar Avinashi Kinha. 32. Jan Hit Prakate Khatu Dhama, Lakh Data Dani Prabhu Shyama. 33. Khatu Dham Moksh Ka Dwara, Shyam Kund Bahe Amrit Dhara. 34. Shudi Dwadashi Phalgun Mela, Khatu Dham Saje Albela. 35. Ekadashi Vrat Jyot Dwadashi, Sabal Kaay Parlok Sudharshi. 36. Kheer Churma Bhog Lagat Hain, Dukh Daridra Kalesh Katat Hain. 37. Shyam Bahadur Sanwal Dhyaye, Aalu Singh Hriday Shyam Basaye. 38. Mohan Manoj Viplav Bhankhe, Shyam Dhani Mhari Pat Rakhe. 39. Nit Prati Jo Chalisa Gave, Sakal Sadh Sukh Vaibhav Pave. 40. Shyam Naam Sam Sukh Jag Nahin, Bhav Bhay Bandh Katat Pal Mahin. Doha: Tribaan De Tridosh Mukti Darsh De Aatm Gyan. Chalisa De Prabhu Bhukti Sumiran De Kalyan. Khatu Nagari Dhanya Hain Shyam Naam Jaygaan. Agam Agochar Shyam Hain Viradahin Skand Puran.

खाटू श्याम कौन हैं

राजस्थान के सीकर ज़िले के छोटे से कस्बे खाटू में खाटू श्याम जी की पूजा बर्बरीक के रूप में होती है, जो भीम के पौत्र थे। चालीसा की छठी चौपाई उनका परिवार बताती है: पिता घटोत्कच, जो भीम और राक्षसी हिडिम्बा के पुत्र थे, और माता मोरवी। इसीलिए वे "पांडव वंश के दीपक" हैं। सातवीं चौपाई उनके नाम का कारण बताती है: घुंघराले (बर्बर) केशों के कारण वे बर्बरीक कहलाए। पाँचवीं चौपाई जोड़ती है कि पिछले जन्म में वे सूर्यवर्चा नाम के यक्ष थे।

मंदिर में उनका जो रूप दिखता है, वह पहली चौपाइयों से मेल खाता है। साँवला रंग, केसर का तिलक, मोर मुकुट, केसरिया बागा और गले में वैजयंती माला। वे नीले घोड़े पर सवार हैं, हाथ में मोरछड़ी है, और तीन बाण हैं। ये तीन बाण ही उनकी कथा की कुंजी हैं।

वचन और शीश दान

चौपाई 8 से 15 उनकी साधना बताती हैं। माँ मोरवी ने कृष्ण से पूछा कि उनके पुत्र के जीवन का लक्ष्य क्या हो। कृष्ण ने बालक को गुप्त क्षेत्र में देवी की आराधना के लिए भेजा। वहाँ वे बाल ब्रह्मचारी रहे, तप किया, और देवियों से प्रबल तेज और अथाह बल पाया। उन्होंने विजय नाम के ब्राह्मण के यज्ञ की रक्षा की, नौ करोड़ पलाशी दैत्यों को मारा, और नागलोक में वासुकि का भय दूर किया।

चालीसा का मर्म चौपाई 16 से 25 में है। बर्बरीक महाभारत का युद्ध देखने निकले। जाने से पहले माँ ने उनसे वचन लिया कि जो पक्ष हार रहा हो, वे उसका साथ देंगे (पराजित प्रति)। इसीलिए चौपाई 19 उन्हें हारे का सदैव हितकारी कहती है। मार्ग में उन्हें कृष्ण मिले। अपना बल दिखाने के लिए उनके एक बाण ने तीनों लोक हिला दिए। कृष्ण ने समझ लिया कि ऐसा योद्धा, जो हमेशा हारते पक्ष की ओर चला जाए, युद्ध को कभी समाप्त नहीं होने देगा। धर्मयुद्ध की दुहाई देकर कृष्ण ने उनसे शीश दान माँगा। बर्बरीक ने शीश दे दिया। देवताओं ने अमृत बरसाया, देवी ने शीश को अमृत से सींचा, और केशव ने उसे पर्वत की चोटी पर रखा, ताकि बर्बरीक अपनी इच्छा के अनुसार पूरा युद्ध देख सकें।

युद्ध के बाद का न्याय

चौपाई 28 से 30 में कथा का सबसे तीखा मोड़ है। विजय के बाद पांडव गर्व से बहस करने लगे कि जीत किसकी वजह से हुई। उन्होंने उस शीश से पूछा, जिसने सब कुछ देखा था। बर्बरीक का निर्णय था: सुदर्शन चक्र सिर काट रहा था, और रणचंडी लहू पी रही थीं। इस उत्तर के बाद किसी का गर्व नहीं बचा, और जग में जयकार गूँज उठी। तब कृष्ण ने उन्हें अपना ही नाम श्याम दिया और अजर-अमर-अविनाशी बना दिया।

यह कथा व्यास के महाभारत में नहीं है। यह बाद की परंपरा से आती है, और चालीसा की अंतिम पंक्ति श्याम की कीर्ति का श्रेय स्कंद पुराण को देती है।

खाटू धाम, मेला और भोग

चौपाई 32 से 36 कथा से मंदिर पर आती हैं। लोगों के हित के लिए श्याम खाटू में लखदातार बनकर प्रकट हुए। खाटू धाम को मोक्ष का द्वार कहा गया है, और श्याम कुंड में अमृत की धारा बहती है। यह वही कुंड है जहाँ उनका शीश मिलने की मान्यता है। फाल्गुन शुक्ल द्वादशी के बड़े मेले में खाटू सज उठता है, और कई भक्त निशान लेकर रींगस से पैदल आते हैं। भक्त एकादशी का व्रत रखते हैं, द्वादशी को ज्योत जलाते हैं, और खीर-चूरमे का भोग लगाते हैं।

चौपाई 37 खाटू परंपरा के दो पूज्य भक्तों का नाम लेती है, श्याम बहादुर और आलू सिंह। कवि अपना नाम "विप्लव" लिखते हैं, पहले दोहे में भी और चौपाई 38 में भी, जहाँ राजस्थानी में कहते हैं: श्याम धणी म्हारी पत राखे, यानी श्याम प्रभु मेरी लाज रखते हैं।

पाठ कैसे होता है

भक्त इसका पाठ एकादशी और द्वादशी को करते हैं, जिन दिनों को चालीसा स्वयं श्याम की पूजा से जोड़ती है। रात भर चलने वाले जागरण और कीर्तन में भी इसे गाया जाता है। कई लोग खाटू यात्रा से पहले इसे पढ़ते हैं, या तब संकल्प लेकर पढ़ते हैं जब उन्हें लगे कि वे "हार" रहे हैं, क्योंकि श्याम का पूरा वचन ही हारे का सहारा बनना है। अंतिम दोहा उनके वरदानों को गिनाता है: तीन बाण तीन दोषों से मुक्ति देते हैं, दर्शन आत्मज्ञान देता है, चालीसा सांसारिक सुख देती है, और उनका सुमिरन परम कल्याण देता है।

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