संकष्टी का अर्थ
संकष्टी (संकट चतुर्थी) का अर्थ है "संकटों से मुक्ति"। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — पूर्णिमा के बाद की चौथी तिथि — को विघ्नहर्ता गणेश के सम्मान में रखा जाता है। (शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी है; भाद्रपद की गणेश चतुर्थी बड़ा वार्षिक पर्व है।)
विशेष संकष्टी
- अंगारकी संकष्टी: जब चतुर्थी मंगलवार को पड़े (अंगारक मंगल हैं)। इसे वर्ष भर की सभी संकष्टी के बराबर माना जाता है।
- सकट चौथ / तिल चौथ माघ में: उत्तर भारत में माताएँ संतान की दीर्घायु के लिए व्यापक रूप से रखती हैं, तिल-गुड़ के भोग के साथ।
- हर महीने की संकष्टी का गणेश जी का अपना नाम और गणेश पुराण परंपरा में अपनी कथा है।
विधि
- सुबह जल्दी स्नान करके संकल्प लें, और दिन भर उपवास रखें — बहुत लोग फल, दूध और साबूदाना लेते हैं; कुछ पूर्ण उपवास।
- शाम को गणेश पूजा करें: लाल फूल, 21 दूर्वा, मोदक या लड्डू, अक्षत, सिंदूर, धूप और दीप। संकटनाशन गणेश स्तोत्र और उस महीने की संकष्टी कथा पढ़ें।
- ॐ गं गणपतये नमः या वक्रतुण्ड महाकाय का जप करें।
- चंद्रोदय पर चन्द्रमा को अर्घ्य दें — लोटे से दूध मिला जल, फूल और अक्षत — और प्रार्थना करें।
- तभी व्रत खोलें, पहले प्रसाद से।
चन्द्रमा क्यों?
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार चन्द्रमा ने एक बार गणेश जी के गोल उदर और गज-मुख पर हँसी उड़ाई, और गणेश जी ने उन्हें शाप दिया। चन्द्रमा के पश्चाताप पर शाप कोमल हुआ — और चतुर्थी पर चन्द्रमा की पूजा गणेश जी के अपने व्रत का अंग बन गई। (इसके विपरीत भाद्रपद की गणेश चतुर्थी पर इसी कथा के कारण परंपरा से चन्द्रमा को नहीं देखा जाता।)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकष्टी चतुर्थी कब होती है?
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को — पूर्णिमा के बाद चौथे दिन।
संकष्टी का व्रत कब खोला जाता है?
चंद्रोदय के बाद, चन्द्रमा को अर्घ्य देकर। अपने नगर का चंद्रोदय समय देखें, जो बदलता रहता है।
अंगारकी संकष्टी क्या है?
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी; इसे विशेष फलदायी माना जाता है।
संकष्टी पर गणेश जी को क्या चढ़ाएँ?
दूर्वा (21), लाल फूल, मोदक या लड्डू, और सिंदूर।
क्या सकट चौथ और संकष्टी एक ही हैं?
सकट चौथ माघ मास की संकष्टी है, जिसे विशेषकर माताएँ संतान के लिए रखती हैं।
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