मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥ ३४ ॥
man-manā bhava mad-bhakto mad-yājī māṁ namaskuru mām evaiṣhyasi yuktvaivam ātmānaṁ mat-parāyaṇaḥ
हिंदी अर्थ
मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके, मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा।
भावार्थ
"मन्मना भव मद्भक्तः" — यह चार भागों वाला आह्वान (मेरा चिंतन करो, मुझसे प्रेम करो, मेरी पूजा करो, मुझे प्रणाम करो) भक्ति के पूरे मार्ग का सार है। गीता के अंत के निकट 18.65 में यह लगभग शब्दशः दोहराया गया है।