श्रीभगवानुवाच । भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥ १ ॥
śhrī bhagavān uvācha bhūya eva mahā-bāho śhṛiṇu me paramaṁ vachaḥ yatte ’haṁ prīyamāṇāya vakṣhyāmi hita-kāmyayā
हिंदी अर्थ
श्रीभगवान बोले: हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझ अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए तेरे हित की इच्छा से कहूँगा।
भावार्थ
श्रीकृष्ण अब व्याख्यान देने वाले शिक्षक की तरह नहीं, बल्कि उस मित्र की तरह बोलते हैं जो सुनने में अर्जुन का आनंद (प्रीयमाणाय) देखता है। दसवाँ अध्याय ईश्वर की विभूतियाँ प्रकट करता है ताकि अर्जुन सर्वत्र ईश्वर को पहचान सकें।