मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् । हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते ॥ १० ॥
mayādhyakṣheṇa prakṛitiḥ sūyate sa-charācharam hetunānena kaunteya jagad viparivartate
हिंदी अर्थ
हे कौन्तेय! मुझ अधिष्ठाता के सकाश से प्रकृति चराचर सहित सर्व जगत को रचती है; इसी हेतु से यह संसार-चक्र घूम रहा है।
भावार्थ
ईश्वर "अध्यक्ष" — अधिष्ठाता — हैं। सृजन का कार्य प्रकृति करती है, पर केवल उनकी उपस्थिति में, जैसे बगीचा इसलिए बढ़ता है क्योंकि सूर्य उस पर चमकता है, बिना सूर्य के माली बने।