Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 10

मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् । हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते ॥ १० ॥

mayādhyakṣheṇa prakṛitiḥ sūyate sa-charācharam hetunānena kaunteya jagad viparivartate

हिंदी अर्थ

हे कौन्तेय! मुझ अधिष्ठाता के सकाश से प्रकृति चराचर सहित सर्व जगत को रचती है; इसी हेतु से यह संसार-चक्र घूम रहा है।

भावार्थ

ईश्वर "अध्यक्ष" — अधिष्ठाता — हैं। सृजन का कार्य प्रकृति करती है, पर केवल उनकी उपस्थिति में, जैसे बगीचा इसलिए बढ़ता है क्योंकि सूर्य उस पर चमकता है, बिना सूर्य के माली बने।

भगवद्गीता अध्याय 9.10 | Bhakti Arohan