Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 23

यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः । प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥ २३ ॥

yatra kāle tvanāvṛittim āvṛittiṁ chaiva yoginaḥ prayātā yānti taṁ kālaṁ vakṣhyāmi bharatarṣhabha

हिंदी अर्थ

हे भरतश्रेष्ठ! जिस काल में शरीर त्यागकर गए हुए योगीजन तो वापस न लौटने वाली गति को, और जिस काल में गए हुए वापस लौटने वाली गति को प्राप्त होते हैं, वह काल अर्थात् दोनों मार्ग मैं कहूँगा।

भावार्थ

श्लोक 23–26 मृत्यु के बाद के दो मार्गों का वर्णन करते हैं, जो प्राचीन उपनिषद्-शिक्षा से लिए गए हैं: एक मुक्ति की ओर, दूसरा वापसी की ओर। टीकाकार इन "कालों" को हर मार्ग पर प्रकाश और अंधकार के अधिष्ठाता देवता मानते हैं।

भगवद्गीता अध्याय 8.23 | Bhakti Arohan