पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ । जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु ॥ ९ ॥
puṇyo gandhaḥ pṛithivyāṁ cha tejaśh chāsmi vibhāvasau jīvanaṁ sarva-bhūteṣhu tapaśh chāsmi tapasviṣhu
हिंदी अर्थ
मैं पृथ्वी में पवित्र गंध और अग्नि में तेज हूँ; सब प्राणियों में उनका जीवन हूँ और तपस्वियों में तप हूँ।
भावार्थ
वर्षा के बाद मिट्टी की सुगंध, अग्नि का तेज, हर प्राणी में जीवन-शक्ति — श्रीकृष्ण स्वयं को वह सार-गुण बताते रहते हैं जो हर वस्तु को वह बनाता है जो वह है।