एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय । अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥ ६ ॥
etad-yonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya ahaṁ kṛitsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayas tathā
हिंदी अर्थ
सब प्राणी इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं, ऐसा समझो। मैं संपूर्ण जगत का उत्पत्ति-स्थान और प्रलय-स्थान हूँ।
भावार्थ
जो कुछ भी जीवित है, वह पदार्थ और चेतना का संयोग है, और दोनों ईश्वर से आते हैं। वे सबके आदि (प्रभव) और अंत (प्रलय) हैं।