Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 7, श्लोक 5

अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् । जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥ ५ ॥

apareyam itas tvanyāṁ prakṛitiṁ viddhi me parām jīva-bhūtāṁ mahā-bāho yayedaṁ dhāryate jagat

हिंदी अर्थ

यह मेरी अपरा (निम्न) प्रकृति है। हे महाबाहो! इससे भिन्न मेरी जीव रूपी परा (उच्च) प्रकृति को जानो, जिससे यह संपूर्ण जगत धारण किया जाता है।

भावार्थ

दो प्रकृतियाँ: अपरा, निम्न (पदार्थ और मन), और परा, उच्च — चेतन जीव। दोनों ईश्वर की हैं। हर प्राणी में स्थित आत्मा को यहाँ ईश्वर की अपनी उच्च शक्ति का अंश बताया गया है।

भगवद्गीता अध्याय 7.5 | Bhakti Arohan