दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया । मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥ १४ ॥
daivī hyeṣhā guṇa-mayī mama māyā duratyayā mām eva ye prapadyante māyām etāṁ taranti te
हिंदी अर्थ
मेरी यह त्रिगुणमयी दैवी माया बड़ी दुस्तर है; परंतु जो पुरुष केवल मेरी ही शरण लेते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।
भावार्थ
भक्ति-परंपरा का एक केंद्रीय श्लोक। माया — वह शक्ति जो हमें ईश्वर को भुलाती है — केवल अपने प्रयास से पार करने के लिए बहुत प्रबल है। पार जाने का मार्ग है माया के स्वामी ईश्वर की शरणागति (प्रपत्ति)।