श्रीभगवानुवाच । पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते । न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥ ४० ॥
śhrī bhagavān uvācha pārtha naiveha nāmutra vināśhas tasya vidyate na hi kalyāṇa-kṛit kaśhchid durgatiṁ tāta gachchhati
हिंदी अर्थ
श्रीभगवान बोले: हे पार्थ! उस पुरुष का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में; क्योंकि हे प्यारे! आत्मोद्धार के लिए कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।
भावार्थ
श्रीकृष्ण का उत्तर स्नेह से भरा है — वे अर्जुन को "तात" भी कहते हैं, जो "मेरे प्यारे" जैसा कोमल शब्द है। "न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति" — भलाई करने वाला कोई भी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। कोई भी सच्चा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।